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मैत्रीबोध परिवार द्वारा आयोजित योग शिविर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया योग साधना

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रायगढ़। महाराष्ट्र राज्य में मुंबई से लगभग 100 किमी की दूरी पर स्थित शांतिक्षेत्र प्रेमगिरि आश्रम, कर्जत (रायगढ़) में मैत्रीबोध परिवार ने एक अनूठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया, जिसमें मैत्री संस्कृति तथा योग से प्राप्त समग्र स्वास्थ्य लाभों का सुंदर संगम देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर सैकड़ों लोगों ने एकत्रित होकर योग के वास्तविक स्वरूप का अनुभव किया और इस दिवस को उत्सव के रूप में मनाया।

मानवता के उत्थान और व्यक्ति के अंतर्मन के पोषण के लिए समर्पित सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन मैत्रीबोध परिवार योग को आंतरिक परिवर्तन तथा सामूहिक कल्याण का एक प्रभावशाली माध्यम मानता है। इसके आध्यात्मिक मूल्य और दृष्टिकोण, योग को जीवन-पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए कार्यरत आयुष मंत्रालय की भावना के साथ गहराई से सामंजस्य रखते हैं।

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य अंग है। इस तथ्य को और अधिक बल प्रदान करते हुए भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत इस आयोजन में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक नवाचार और तकनीकी प्रगति भारत को नई ऊँचाइयों तक अवश्य पहुँचाएँगे, किन्तु हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ें ही वह शक्ति, स्थिरता और विवेक प्रदान करेंगी जो भारत को अपनी विकास यात्रा में विशिष्ट और अनुपम बनाए रखेंगी।

मैत्रीबोध परिवार के संस्थापक, दूरदर्शी एवं परिवर्तन के प्रणेता, मैत्रेय दादाश्रीजी ने मैत्री और संस्कृति के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये शाश्वत मूल्य समाज को एकसूत्र में बाँध सकते हैं और भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सार्थक सामाजिक परिवर्तन का आधार व्यक्ति का आंतरिक परिवर्तन है।

योग दिवस को सफल बनाने के लिए गोपाल कृष्ण अग्रवाल उपस्थित रहे, जो राष्ट्रीय विकास हेतु संस्कृति, अर्थव्यवस्था और नीतियों को जोड़ने वाली विभिन्न पहलों में मैत्रीबोध परिवार के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। साथ ही प्रातःकालीन योग साधना शिविर में प्रसिद्ध अभिनेता मकरंद देशपांडे और कर्जत-खालापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक महेंद्र सदाशिव थोरवे की भी उपस्थिति रही। विधायक थोरवे संगठन की विभिन्न पहलों के अनुरूप ग्रामीण कर्जत के विकास और परिवर्तन के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

इस आयोजन ने प्रतिभागियों को योग को केवल आसनों और शारीरिक व्यायाम तक सीमित न रखकर, शरीर, मन और चेतना के मिलन के रूप में उसकी गहन अनुभूति प्रदान की।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरते हुए गणेश वंदना तथा भारत की प्राचीन योगिक कला मल्लखंभ की मनोहारी प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं। मल्लखंभ अपनी शक्ति, लचीलेपन, संतुलन और अनुशासन को विकसित करने की क्षमता के लिए विश्वविख्यात है।

आध्यात्मिकता, संस्कृति, सामुदायिक सहभागिता और स्वास्थ्य को एक मंच पर एकत्रित करने वाला शांतिक्षेत्र प्रेमगिरि आश्रम का यह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह भारत की सनातन ज्ञान परंपरा और आधुनिक युग में उसकी प्रासंगिकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।

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