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महानगरपालिका ने थोक कचरा उत्पादकों के लिए जागरूकता एवं मार्गदर्शन बैठक आयोजित की

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शहर में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका द्वारा 2 अगस्त 2026 को प्रभाग समिति एच एवं आई क्षेत्र के थोक कचरा उत्पादकों (Bulk Waste Generators – BWGs) के लिए जागरूकता एवं मार्गदर्शन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में महापौर श्री अजीव पाटील तथा आयुक्त श्री पृथ्वीराज बी. पी. (भा.प्र.से.) उपस्थित रहे।

बैठक में बताया गया कि ऐसे संस्थान जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, अथवा जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्गफुट या उससे अधिक है, या जिनका दैनिक जल उपभोग 40,000 लीटर या उससे अधिक है, उन्हें थोक कचरा उत्पादक (Bulk Waste Generators) की श्रेणी में रखा गया है।

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं। इन नियमों में विस्तारित थोक कचरा उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Bulk Waste Generator Responsibility – EBWGR) तथा स्रोत स्तर पर कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसी उद्देश्य से आवासीय सोसायटी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, होटल, मंगल कार्यालय तथा अन्य बड़े कचरा उत्पादकों के लिए यह विशेष बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विशेषज्ञों द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। ध्यास फाउंडेशन और विंग्स फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने थोक कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारियों, गीले, सूखे, स्वच्छता संबंधी एवं विशेष देखभाल योग्य कचरे के स्रोत स्तर पर पृथक्करण, गीले कचरे के स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक निस्तारण, EBWGR के अंतर्गत पंजीकरण प्रक्रिया, नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान तथा महानगरपालिका और कचरा उत्पादकों के बीच समन्वय व्यवस्था की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण तथा व्यावसायिक एवं आवासीय प्रतिष्ठानों की संख्या में वृद्धि के कारण ठोस कचरा प्रबंधन अब केवल महानगरपालिका की जिम्मेदारी नहीं रह गया है, बल्कि प्रत्येक नागरिक, संस्था, हाउसिंग सोसायटी, होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, बाजार, मॉल और बड़े कचरा उत्पादकों की सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है।

बैठक में बताया गया कि जैविक अथवा गीला कचरा उत्पन्न करने वाले बड़े संस्थानों को कंपोस्टिंग, बायोगैस अथवा अन्य स्वीकृत वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से उसी स्थान पर कचरे का निस्तारण करना चाहिए। इससे कचरे के परिवहन, परिवहन लागत, दुर्गंध, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव तथा लैंडफिल पर पड़ने वाले भार में कमी आएगी। साथ ही कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच एवं अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखे कचरे का उचित पृथक्करण कर अधिकृत प्रणाली के माध्यम से उसका पुनर्चक्रण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

आयुक्त श्री पृथ्वीराज बी. पी. ने कहा कि जिन हाउसिंग सोसायटियों एवं अन्य संस्थानों ने अभी तक कचरा पृथक्करण एवं प्रसंस्करण व्यवस्था लागू नहीं की है, वे इसे तत्काल शुरू करें। उन्होंने कहा कि महानगरपालिका इस दिशा में हर संभव तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि कचरा प्रसंस्करण व्यवस्था अपनाने वाले संस्थानों को संपत्ति कर (हाउस टैक्स) में 5 प्रतिशत की छूट दी जा रही है तथा भविष्य में इस छूट को बढ़ाने का प्रस्ताव भी महानगरपालिका महासभा के विचाराधीन है।

महापौर श्री अजीव पाटील ने कहा कि यदि कचरा प्रबंधन व्यवस्था लागू करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई आती है तो संबंधित संस्थान महानगरपालिका से संपर्क करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे स्वयं, सभी नगरसेवक तथा महानगरपालिका प्रशासन हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे।

बैठक में सभी संबंधित संस्थानों से अपील की गई कि वे अपने यहां उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे का नियमों के अनुसार प्रबंधन सुनिश्चित करें। जिन संस्थानों ने अभी तक कचरा पृथक्करण एवं प्रसंस्करण व्यवस्था शुरू नहीं की है, वे इसे तत्काल लागू करें तथा 30 दिनों के भीतर अपनी कचरा प्रबंधन व्यवस्था, आवश्यक अभिलेख एवं अनुपालन रिपोर्ट महानगरपालिका को प्रस्तुत करें। साथ ही नियमों का पालन नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी दी गई।

इस अवसर पर पूर्व महापौर श्री नारायण मानकर, वर्तमान एवं पूर्व नगरसेवक-नगरसेविकाएं, विभिन्न पदाधिकारी, महानगरपालिका के अधिकारी एवं कर्मचारी, विभिन्न श्रेणी के थोक कचरा उत्पादक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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