
मुंबई। आधुनिक तकनीक जब सेवा और संवेदनाओं से जुड़ती है, तब वह केवल मशीन या उपकरण नहीं रहती, बल्कि किसी के जीवन को फिर से खड़ा करने का माध्यम बन जाती है। इसी भावना के साथ नारायण सेवा संस्थान एवं सौजन्यकर्ता श्री राधा कृष्णा चैरिटेबल फाउंडेशन यूएसए के तत्वावधान में रविवार को मुंबई के निको हॉल, दादर (पूर्व) में विशाल निःशुल्क दिव्यांग शल्य चिकित्सा जांच, चयन तथा जापानी एवं जर्मन तकनीक से निर्मित 3डी प्रिंटेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब मेजरमेंट शिविर आयोजित हुआ।
शिविर में अत्याधुनिक 3डी स्कैनिंग, डिजिटल मेजरमेंट एवं मॉड्यूलर फिटमेंट तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों का परीक्षण और मापन किया गया। संस्थान की विशेषज्ञ डॉक्टर एवं पीएंडओ (प्रोस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक) टीम ने प्रत्येक रोगी की शारीरिक स्थिति, संतुलन, मसल कंट्रोल एवं मूवमेंट का सूक्ष्म परीक्षण कर व्यक्तिगत आवश्यकता अनुसार कृत्रिम अंगों की डिजाइन प्रक्रिया शुरू की।
यह नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब जापानी एवं जर्मन इंजीनियरिंग तकनीक पर आधारित है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले हल्के, मजबूत और टिकाऊ कंपोनेंट्स का उपयोग किया जाता है। 3डी प्रिंटेड सॉकेट तकनीक के कारण लिम्ब की फिटिंग अधिक सटीक होती है, जिससे उपयोगकर्ता को चलने-फिरने में सहजता, संतुलन और आराम मिलता है। पारंपरिक कृत्रिम अंगों की तुलना में यह तकनीक अधिक एर्गोनोमिक, कम वजन वाली तथा लंबे समय तक उपयोगी मानी जाती है।
संस्थान के डॉ. मानस रंजन साहू ने बताया कि डिजिटल मापन प्रणाली के कारण प्रत्येक दिव्यांगजन के शरीर की संरचना के अनुसार कस्टमाइज्ड लिम्ब तैयार किया जाएगा। इससे घर्षण, दर्द एवं असंतुलन जैसी समस्याएं कम होंगी और उपयोगकर्ता अधिक प्राकृतिक तरीके से चल-फिर सकेंगे। कई दिव्यांगजन पहली बार ऐसी उन्नत तकनीक आधारित कृत्रिम अंग सेवा से जुड़कर उत्साहित दिखाई दिए। मुंबई शाखा अध्यक्ष महेश अग्रवाल एवं ट्रस्टी देवेन्द्र चौबीसा ने मुख्य अतिथि राधाकृष्ण चेरिटेबल की जयश्री बेन, दादर विधायक कालिदास कोलंबकर, सियाराम ग्रुप के रमेश आशा जी पोद्दार, रोटरी क्वीन सिटी प्रेसिडेंट डॉ श्याम एवं साधना सिंघानिया, समाज सेवी निम्मी तोरानी, अग्रवाल सम्मेलन के शिवकांत खेतान, ओजस संस्थान के अतुल शाह और रोटरी के पूर्व गवर्नर डॉ राजेंद्र अग्रवाल सहित संस्थान सदस्यों एवं अतिथियों का स्वागत किया।
शिविर का उद्घाटन जयश्री बेन और विधायक कालिदास कोलंबकर सहित गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि ने संबोधित करते हुए कहा कि नारायण सेवा संस्थान आधुनिक तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर वास्तविक सामाजिक नवाचार का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को विश्वस्तरीय तकनीक से निर्मित कृत्रिम अंग निःशुल्क उपलब्ध कराना अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी प्रयास है।
अध्यक्षता कर रहे दादर के विधायक ने कहा कि संस्थान केवल उपचार नहीं कर रहा बल्कि तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों को आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति वर्षों बाद अपने पैरों पर खड़ा होता है या अपने हाथों से फिर कार्य करने लगता है, तो वह क्षण केवल चिकित्सा नहीं बल्कि जीवन पुनर्निर्माण का प्रतीक बन जाता है। इस शिविर में 170 से अधिक सभी आयु वर्ग के दिव्यांगजनों ने लाभ लिया।
ट्रस्टी एवं निदेशक देवेन्द्र चौबीसा ने शिविर की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान की डॉक्टर एवं पीएंडओ टीम ने सभी रोगियों की जांच कर 70 दिव्यांगों के लिए 3डी प्रिंटेड नारायण लिम्ब हाथ-पैर तथा 29 के लिए कैलिपर्स हेतु डिजिटल मेजरमेंट लिए। इस शिविर में
करीब 23 दिव्यांग रोगियों का चयन निःशुल्क शल्य चिकित्सा हेतु किया गया।
उन्होंने बताया कि आज जिन रोगियों की कास्टिंग और डिजिटल स्कैनिंग की गई है, उनके लिए आगामी 1 से 2 माह में विशेष मॉड्यूलर नारायण लिम्ब तैयार कर पुनः मुंबई में आयोजित शिविर में फिटमेंट किया जाएगा। ये लिम्ब हल्के, टिकाऊ, फ्लेक्सिबल एवं लंबे समय तक उपयोगी होंगे, जिससे दिव्यांगजन सामान्य जीवन, शिक्षा, रोजगार और दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भाग ले सकेंगे।
शिविर में सभी रोगियों एवं परिजनों के लिए संस्थान द्वारा निःशुल्क भोजन, चाय एवं अल्पाहार की व्यवस्था की गई। संस्थान की 40 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने सेवाएं प्रदान कीं तथा शिविर प्रभारी हरि प्रसाद लड्ढा थे।
उल्लेखनीय है कि नारायण सेवा संस्थान वर्ष 1985 से दिव्यांगजनों के पुनर्वास, उपचार एवं आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कार्यरत है। संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है, वहीं संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। संस्थान अब तक 39,388 से अधिक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं 4.52 लाख से अधिक रोगियों को निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान कर चुका है।

