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डोंबिवली पूर्व में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास फेरीवालों का आंदोलन

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(संवाददाता : प्रतीक गुप्ता)

डोंबिवली: पिछले लगभग एक महीने से डोंबिवली (पूर्व) और डोंबिवली (पश्चिम) के फेरीवालों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना, कडोमपा प्रशासन द्वारा उन्हें रोज़ी-रोटी से वंचित किया जा रहा है, ऐसा आरोप फेरीवाला संघटना ने लगाया है।

रोज कमाकर खाने वाले फेरीवाले मजबूरी में अपना सामान बेचने के लिए लगाते हैं, तो कार्रवाई दल द्वारा उनके नाशवंत माल (सब्जियां, फल) को नष्ट कर दिया जाता है। वहीं अन्य सामान जब्त कर लिया जाता है और वापस नहीं दिया जाता। जब्ती के समय पंचनामा भी नहीं किया जाता, जिससे फेरीवालों में भारी नाराज़गी है।

फेरीवाला कानून 2014 के तहत फेरीवालों को संरक्षण देना आवश्यक है, लेकिन प्रशासन इस मामले में उदासीन नजर आ रहा है। हर पांच साल में सर्वेक्षण करना अनिवार्य होने के बावजूद, 2014 के सर्वे के आधार पर ही 2026 में योजना बनाई जा रही है। इसलिए नया सर्वेक्षण कराकर नई टाउन वेंडिंग कमेटी के गठन की मांग की गई है।

प्रमुख मांगें:

  • फेरीवाला कानून 2014 की धारा 3(3) के अनुसार तुरंत कार्रवाई बंद की जाए
  • फेरीवालों का नया सर्वेक्षण तुरंत किया जाए
  • नई टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया जाए
  • शहर विकास योजना में फेरीवालों के लिए 2.5% स्थान आरक्षित किया जाए
  • सामान जब्त करते समय पंचनामा कर उसकी प्रति फेरीवालों को दी जाए
  • जब्त किया गया सामान मामूली जुर्माना लेकर वापस किया जाए, नाशवंत माल तुरंत छोड़ा जाए
  • फेरीवाला कानून 2014 का सख्ती से पालन किया जाए
  • डोंबिवली स्टेशन के आसपास की कलेक्टर भूमि को धीरे-धीरे अपने कब्जे में लेकर सार्वजनिक उपयोग में लाया जाए

फेरीवाला संघटना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा और “जेल भरो आंदोलन” भी किया जाएगा।


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