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स्कूली बच्चों के संवेदनशील मुद्दे पर आधारित हिंदी फिल्म “टेक इट इजी” 4 जुलाई को होगी रिलीज

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हिंदी फिल्म “टेक इट ईज़ी” 4 जुलाई को सिनेमाघरों में होगी रिलीज

मुंबई। स्पेशल किड्स को लेकर बनी फिल्म समाज को एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश देती है। बच्चों पर माता पिता के दबाव के कारण क्या असर पड़ता है, इसी विषय पर आधारित निर्माता धर्मेश पंडित की सुनील प्रेम व्यास निर्देशित फ़िल्म “टेक इट ईज़ी” इस सप्ताह 4 जुलाई को रिलीज के लिए तैयार है।

विक्रम गोखले, दीपान्निता शर्मा, राज जुत्शी, अनंग देसाई जैसे प्रसिद्ध कलाकारों से सजी फ़िल्म “टेक इट ईज़ी” को कई फ़िल्म फेस्टिवल्स में अवार्ड्स और नॉमिनेशन मिले हैं। ग्वालियर के फ़िल्म फेस्टिवल में टेक इट ईज़ी ने बेस्ट चिल्ड्रन फ़िल्म का अवार्ड जीता है जबकि जयपुर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में भी इस फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म की कैटगरी में नॉमिनेट किया गया। ओशो की किताब “शिक्षा से क्रांति” से प्रेरित होकर धर्मेश पंडित ने फ़िल्म टेक इट ईज़ी की कहानी लिखी है।

प्रोड्यूसर धर्मेश पंडित का मानना है कि स्कूलों के बच्चों के मासूम कंधों पर किताबों का इतना ज्यादा वजन डाल दिया गया है। उन्हें अपने माता पिता की उम्मीदों का भार भी उठाना पड़ता है। मुकाबले के इस दौर में इच्छा रखते हैं कि उनका बच्चा स्कूल में पढ़ाई का मामला हो या खेल कूद का क्षेत्र हो नंबर वन ही आए। सोसाईटी में कंपीटिशन का ऐसा वातावरण बना दिया गया है कि बच्चे को कुछ बनाने की जैसे होड़ मची हुई है। बच्चों के दिल दिमाग पर इसका बहुत गहरा दबाव पड़ता है। इन दिनों बच्चे भी जीवन को लेकर कभी कभी खतरनाक कदम उठा लेते हैं। फिल्म ‘टेक इट ईज़ी’ एक आंख खोलने वाला सिनेमा है जो बच्चों के साथ उनके मां बाप को भी देखना चाहिए।

इस फ़िल्म के कुछ दृश्य दर्शकों को भावनात्मक कर देने वाले हैं। फिल्म के सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय किया है। फ़िल्म ‘टेक इट ईज़ी’ के माध्यम से निर्माता ने एक प्रभावी संदेश समाज को बच्चों को और अभिभावकों को दिया है और फिल्म में उसे बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि धर्मेश पंडित को दादासाहेब फाल्के फ़िल्म फाउंडेशन अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया था। इस फ़िल्म मे एक गीत सोनू निगम ने गाया है। फ़िल्म का संगीत ज़ी म्युज़िक ने जारी किया है। हिंदी और साउथ की लैंगुएज के साथ यह फ़िल्म 10 भाषाओं में डब की गई है।

फिल्म की कहानी दो बच्चों के बारे में है। एक बच्चे का पिता खिलाड़ी रह चुका है इसलिए वह अपने बेटे को भी प्लेयर बनाना चाहता है, जबकि बच्चे की रुचि पढ़ाई में है। दूसरे बच्चे के पिता की ख्वाहिश है कि उसका पुत्र खूब पढ़े लिखे, मगर बच्चे को कुछ और पसन्द है। माता पिता कैसे बच्चों के जरिए अपने ख्वाबो को पूरा करना चाहते हैं। इस फ़िल्म की कहानी का पॉइंट यह है। मगर इसके साथ ही कई और मुद्दों को भी इस कहानी में पिरोने का प्रयास किया है। किस प्रकार आजकल स्कूलों में एडमिशन और दूसरी बातों को लेकर स्कूल मैनेजमेंट की हरकतें होती हैं, भारी फीस वाली इंग्लिश मीडियम स्कूलों में माता पिता अपने बच्चों को प्रवेश दिलाना चाहते हैं। इन सब बातों को भी इसमें दर्शाया गया है।

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