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ब्रह्मांड वैज्ञानिक बलदेवकृष्ण शर्मा लिखित पुस्तक “नेचुरल यूनिवर्स एक्सपैंशन” का विमोचन मुंबई में संपन्न

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यह पुस्तक ब्रह्मांड के लिए एक साहसिक नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

मुंबई। प्रसिद्ध कॉस्मो-साइंटिस्ट (ब्रह्मांड वैज्ञानिक) और नवप्रवर्तक बलदेवकृष्ण शर्मा की नई पुस्तक नेचुरल यूनिवर्स एक्सपैंशन का अनावरण गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। यह पुस्तक ब्रह्मांड के विस्तार का एक क्रांतिकारी नया मॉडल प्रस्तुत करती है, जो हबल के नियम और बिग बैंग सिद्धांत जैसी स्थापित वैज्ञानिक अवधारणाओं को चुनौती देता है।

इस पुस्तक में प्राकृतिक ब्रह्मांड विस्तार नियम (नेचुरल यूनिवर्स एक्सपैंशन लॉ) नामक एक नवीन वैज्ञानिक सिद्धांत प्रस्तुत किया गया है, जिसमें समय को एक महत्वपूर्ण चर के रूप में शामिल किया गया है, एक ऐसा तत्व जिसे लेखक का मानना है कि हबल के नियम में नजरअंदाज किया गया है। श्री शर्मा के अनुसार, इसी कारण ब्रह्मांड के विस्तार को लेकर वर्तमान वैज्ञानिक समझ में मौलिक खामियां मौजूद हैं।

पुस्तक विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा, “प्राकृतिक ब्रह्मांड विस्तार नियम इन खामियों को दूर करता है और एक नया स्थिरांक, न्यू कॉन्स्टैंट, पेश करता है, जो ब्रह्मांड की गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझाता है।”

प्राकृतिक ब्रह्मांड विस्तार न केवल ब्रह्मांडीय विस्तार की यांत्रिकी में गहराई से उतरती है, बल्कि यह हमारे सौर मंडल और पृथ्वी और चंद्रमा के संबंधों की आंतरिक गतिविधियों का भी विश्लेषण करती है। पुस्तक में परमाणु संरचना, तरंग दैर्ध्य, और टेक्टोनिक गतिविधियों जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। इन परंपरागत सिद्धांतों को तर्क व गणितीय प्रमाणों के आधार पर चुनौती दी गई है।

श्री शर्मा ने कहा, “अगर वैज्ञानिक मॉडलों में लगातार विसंगतियाँ सामने आती हैं, तो विज्ञान को उन स्वीकृत धारणाओं से आगे बढ़ना होगा। इस पुस्तक के माध्यम से मेरा उद्देश्य एक ऐसा सिद्धांत प्रस्तुत करना है जो न केवल ज्ञात तथ्यों को स्पष्ट करे बल्कि अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर भी दे सके। ब्रह्मांड, जीवन की तरह, गतिशील और बहुपरत है, जो हम देखते हैं, वह केवल सतह है।”

ब्रह्माण्ड संबंधी सिद्धांतों को पुनर्परिभाषित करने के अतिरिक्त, श्री शर्मा की पर्यावरणीय शोध भी उल्लेखनीय है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन रीसाइक्लिंग, सशक्त ऑक्सीजन निर्माण, घातक मानव चोटों के कारणों का विश्लेषण, और ग्लोबल वार्मिंग जैसे विषयों पर अध्ययन शामिल हैं। इन सभी निष्कर्षों को उन्होंने अपनी वेबसाइट (www.arf-research.com) पर निशुल्क उपलब्ध कराया है, जिनसे जलवायु शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और पर्यावरण संरक्षकों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

श्री शर्मा एस्ट्रोजेनेसिस रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन और प्रमुख वैज्ञानिक हैं, तथा उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रपति विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पूर्ववर्ती पुस्तक Who Are We? What For? में भी उन्होंने ब्रह्मांड के गुरुत्व, अंतरिक्ष और विज्ञान के नियमों को मनुष्य पर लागू करते हुए विवेचित किया था।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर उपस्थित डॉ. ए.पी. जयरामन, मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद परांजपे, डॉ. एस.एस. बर्वे, उमेश राठौड़, निधि चौधरी, वी.वी. रंगनाथन, निर्मला सामंत (मुंबई के पूर्व मेयर और एक वकील) तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों के गहन विचारों तथा अटूट समर्थन के लिए डॉ. बलदेवकृष्ण शर्मा ने आभार प्रकट किया।

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