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अग्निशिखा मंच द्वारा पावस पर कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह सम्पन्न

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नवी मुंबई। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अग्निशिखा मंच द्वारा आनलाईन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विषय ‘गुरु पूर्णिमा और पावस’ पर तीस रचनाकारों ने स्वरचित काव्य पाठ किया।
मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय ने बताया कि सभी कवि कवित्रियों को सम्मान पत्र प्रदान किया गया साथ ही उनकी रचनाओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अलका पाण्डेय ने किया, सरस्वती वंदना राम राय ने किया। कार्यक्रम के समारोह अध्यक्ष डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तंड, मुख्य अतिथि राम राय, विशिष्ठ अतिथि जनार्दन सिंह, संतोष साहू, शिवपूजन पाण्डेय, पन्ना लाल शर्मा रहे। सभी अथिति ने गुरू पूर्णिमा के महत्व को बताया और कवियों को शुभकामनाएं दी।
तो वहीं रचनाकारों ने उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया।
आभार व्यक्त नीरजा ठाकुर ने किया और मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय ने अग्निशिखा मंच का सुंदर सम्मान पत्र दे सभी अथिति और कवि कवियत्री का सम्मान किया।
काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों की सूची में सरोज दुगड़ ‘सविता’, अनिता शरद झा, नीरजा ठाकुर, रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, मीना गोपाल त्रिपाठी, रानी अग्रवाल, डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तंड, राम राय, जनार्दन सिंह, शिवपूजन पांडेय, पन्नालाल शर्मा, रवि शंकर कोलते, सुरेंद्र हरड़े, हीरा सिंह कौशल, कुमकुम वेद सेन, डॉ देवीदीन अविनाशी, ओम प्रकाश पांडेय, ब्रज किशोरी त्रिपाठी, वैष्णवी खत्री, अलका पाण्डेय, मीना कुमारी परिहार, डॉ महताब अहमद आजाद, कुमारी स्वर्णलता का नाम प्रमुख है।
प्रस्तुत है कुछ रचनाकारों की रचनाएं :-
धानी चुन्नर ओढ धरा मस्ती में झूमे पावस में ।
नभ में मंडराते काले काले बादल पावस में ।।
पपिहा पीव पीव पुकारे आसमान में पावस से।
उमड़ घुमड़ कर नीर बहाते शोर मचाते पावस में ।।
झूला झूले सभी सखियां नाचे गाए पावस में ।
रह रह कर बिजुरिया चमके दिल घबराए पावस में।।
कही बादल का फटना, कहीं बाढ़ तो कहीं सुखा ….
कभी घनघोर अंधेरा, कभी बादल गरजे पावस में।
गर्मी से राहत मिले शीतल चले पवन पावस में ।
किसान के मन हर्षाए खेती लहराए पावस में।।
आसमान घिर घिर आए रिमझिम पड़े फुहार।
नदी नाले सब इठलाए सागर की मौज पावस में ।।

  • अलका पाण्डेय

आईं रे आई पावस की ऋतु आई
गरज बरस कर बादल ने की है खूब लड़ाई
रिमझिम रिमझिम जल बरसे
किसानों से बैलों के संग खेतों की है जुताई
देखो-देखो कैसी सुंदर खशियो की बेला है आई

  • नीरजा ठाकुर नीर

आओ मेरे सजना तुम सावन
सुनी बगिया, प्यासी अंखियां
बिन तुम्हारे ना कटती रतिया
सखियां मोहे ताने मारे।।

  • सुरेंद्र हरड़े

हे री सखी सावन आयो रे मदमस्त
झोंका हवा का आया है
प्रेम संदेशा लाया है
प्रियतम का याद सताया है

  • डॉ मीना कुमारी परिहार

उमड़ घुमड़ के वर्षा ला रे कारे कारे बदरा।
पिया मिलन की आस में लगाऊँगी कजरा।।
प्यास से व्याकुल धरा को तृप्त कर जा रे कारे बदरा।
ज्येष्ठ आषाढ़ के घाम से झुलसी धरा पे बहा सावन धारा।

  • हीरा सिंह कौशल

जबसे रूठ गएं है साजन।
रूठ गया है तब से सावन।।
काली घटा जब छा जाती है।
मुझको उनकी याद आती है।।

  • डॉ महताब अहमद आज़ाद

मौसम में अंगराई है
ऋतु पावस की आई है
नाचे मोर पपीहा गाये
ऋतु वर्षा की आई है।।
धरती पर छाई हरियाली
नाच उठी हर डाली डाली
सुख गयी थी जो धरती
वह फिर से मुस्काई है।।
कहर गर्मी का टूटा था
जल दुनिया से रूठा था
पावस के आ जाते ही
खुशियां घर घर गायी है।।
पानी के लिए थे बेदम
लगा मेघ तो भूले गम
घट पनघट भी हर्षाए
वर्षा झमाझम आई है।।

  • श्रीराम रॉय

आया सावन, सावन के झूले डले रे ।
निंदिया उड़ी उड़ी जाए रे, नींद न आए रे, मन मचल मचल जाए रे, ये रात का अंधियारा, मन मोरा घबराए रे, तेरा साथ पाने को, जियरा तरसा जाए रे, आया सावन, सावन के झूले डले रे।

  • डॉ.आशालता नायडू.

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