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गुगल पर छाया युवा साहित्यकार सुनील कुमार प्रिय

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बिहार: कौन कहता है कि पत्थर पर घास नहीं उगता यह कमाल कर के दिखाया है मुजफ्फरपुर जिला के युवा साहित्यकार सुनील कुमार प्रिय ने,अपनी लेखनी के बदौलत देश-विदेश में नाम कमाया हैं। गुगल ने इनका संक्षिप्त जीवनी गुगल पर प्रसारित किया है। गुगल पर इनका नाम हिन्दी में लिखने पर संक्षिप्त जीवनी दिखाया जा रहा हैं। बिहार के लाल
प्रिय ने बिहार के साथ-साथ देश का नाम रौशन किया हैं। गरीब किसान परिवार से आने वाले सुनील कुमार प्रिय ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव के विद्यालय से किया। मैट्रिक के पढ़ाई पारू हाई स्कूल से एवं इन्टर के पढ़ाई शहर के एल एन टी कॉलेज से किया। उच्च शिक्षा बी आर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से प्राप्त किया। छात्र संघ की ओर से दो बार बिहार विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अध्यक्ष रह चुके हैं। इनके द्वारा लिखित पहला नाटक ” अपहरण ” का मंचन राज्यस्तरीय खादी महोत्सव 2005 मुजफ्फरपुर में हुआ। इसके बाद कभी पिछे मुड़कर नहीं देखें। लेखनी के क्षेत्र में आगे बढ़ते चले गए।
प्रिय के पहली रचना हिन्दी में
” मिट्टी के दीप जलाओ ” एवं दुसरी रचना बज्जिका में ‘ बिगनीके माई तनी लावअ तु चदरीया “। इन्होंने सन् 2003 से रचना रच रहें हैं। इन्होंने दो-दो पुस्तक लिख चुके हैं। पहली पुस्तक “मकड़जाल” नुक्कड़ नाटक संग्रह एवं दुसरी पुस्तक अमर शहीद “झलकारी बाई ” बज्जिका महाकाव्य हैं। इनको राष्ट्रीय आवार्ड से नवाजा जा चुके हैं। इनको हाल के दिनों में तीन-तीन बार सम्मानित हो चुके हैं। इनकी उत्कृष्ट रचना, जीविका कैडर- दीदीयों के लिए संघर्ष एवं जन संघर्षो को देखते हुए गुगल ने गुगल पर जगह दिया हैं। इससे साहित्यकारों एवं पत्रकारों में खुशी का महौल हैं।

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