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हिंदी भाषा को “राष्ट्रभाषा” का दर्जा देने के लिए “सत्यमेव जयते सेवार्थ ट्रस्ट” ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र।

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हिंदी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर ध्यान आकर्षित करने और हिंदी भाषा को “राष्ट्रभाषा” का दर्जा देने के लिए “सत्यमेव जयते सेवार्थ ट्रस्ट” ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र।

मुंबई : हिंदी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करने और हिंदी भाषा को “राष्ट्रभाषा” का दर्जा मिलने के लिए प्रतिक कैलाशनाथ गुप्ता (संस्थापक अध्यक्ष – सत्यमेव जयते सेवार्थ ट्रस्ट, उप संपादक – हिन्दुस्तान प्रहरी) ने भारत देश के महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर निवेदन किया। पत्र में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों मिलना चाहिए विस्तार से जानते है –

देश की स्वतंत्रता के पहले से ही यह बात लगभग तय मानी जाती थी कि स्वतंत्रता के पश्चात हिंदुस्तानी/हिंदी भाषा भारत की राष्ट्रभाषा बनेगी। परंतु चूंकि दक्षिण भारतीय राज्यों में लोग हिंदी से परिचित नहीं थे, अतः सन् 1918 में गाँधी जी द्वारा दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की गयी। इसके अतिरिक्त अन्य लोगों ने भी हिंदी/हिंदुस्तानी के प्रचार के लिए प्रयास किए।

परंतु फिर 1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ, तो विभाजन के साथ हुआ। बंटवारे के बाद, पाकिस्तान ने उर्दू (हिंदुस्तानी का वह रूप जिसमें पारसी शब्दों की बहुलता है, तथा लिपि भी पारसी है) को अपनी राष्ट्रभाषा बनाया। इसके परिणाम स्वरूप, भारत में यह निर्णय लिया गया कि भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी (संस्कृत बहुल शब्द तथा देवनागरी लिपि) होगी। यह निर्णय संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर 1949 को लिया गया था, अतः इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

चूंकि एकदम से पूरी व्यवस्था को अंग्रेज़ी से हिंदी नहीं किया जा सकता था, इसलिए 15 वर्ष के लिए अंग्रेजी को भी हिंदी के साथ-साथ राजभाषा का दर्जा दिया गया। फिर जब 15 वर्ष बाद अंग्रेजी को हटाने का समय आया, तो कई जगह के लोगों (विशेषकर तमिलनाडु से) ने इसका विरोध किया। अतः फिर यह निर्णय लिया गया कि अंग्रेज़ी तब तक राजभाषा के रूप में कार्य करती रहेगी, जब तक कि सारे राज्य हिंदी को स्वीकार न कर लें।

लेकिन अब दिन-प्रतिदिन हम उस से और दूर होते जा रहे हैं। अब महाराष्ट्र राज्य में हिंदी के विरोध में आवाज़ें उठती रहती हैं। राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता लोगो के हिंदी में बात करने पर उनसे मार पीट कर रहे है, हम सब हिन्दू होकर भी भाषा के आधार पर एक दूसरे से लड़ रहे है।

जिस तरह भारत देश में कई पेड़, फल, फूल, पशु, पक्षी आदि राष्‍ट्रीय चिन्ह से सम्मानित है भारत की कोई भी घोषित राष्ट्रभाषा नहीं है।

स्वयं हिंदी भाषी लोग ही अपनी भाषा के बजाय अंग्रेज़ी को प्राथमिकता देते हैं जो हमारे देश की भाषा है ही नहीं, तथा हिंदी को एक नीची भाषा के रूप में पेश करते हैं। विश्व में तीसरी-चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा अपने ही लोगों से सम्मान नहीं पाती।

हालांकि, हाल के वर्षों में, हिंदी भाषा को लेकर कुछ विवाद सामने आए हैं, खासकर शिक्षा और सरकारी कामकाज के क्षेत्र में। कुछ लोग हिंदी को थोपे जाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि कुछ लोग हिंदी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।
यह विवाद न केवल भाषा के मुद्दे पर है, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता से भी जुड़ा है।

भारत देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने में हिंदी भाषा का बहुत बड़ा योगदान था। देश के विकास में राजभाषा हिंदी का बहुत महत्व है। हिंदी भारत की सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है और यह राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान:
हिंदी, भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साथ जोड़ती है, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है.

यह भाषा, भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान को पूरे देश में प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.

हिंदी के माध्यम से, विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का आदान-प्रदान होता है, जिससे एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र का निर्माण होता है.

आर्थिक विकास:
हिंदी, भारत में व्यापार और वाणिज्य के लिए एक महत्वपूर्ण भाषा है।

यह भाषा, देश के भीतर और बाहर दोनों जगह व्यापारिक लेनदेन को सुगम बनाती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है.

हिंदी, सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं.

अन्य लाभ:
हिंदी, भारत सरकार की आधिकारिक भाषा है और सरकारी योजनाओं और सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण साधन है.

हिंदी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य सामाजिक सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाती है, जिससे नागरिकों को सशक्त बनाने में मदद मिलती है.

हिंदी का उपयोग करके, देश के लोग अपनी बात को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं और दूसरों के विचारों को समझ सकते हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि होती है.

निष्कर्ष:
राष्ट्रभाषा हिंदी का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। यह न केवल राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है, बल्कि आर्थिक विकास, शिक्षा, और सामाजिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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