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कार्यक्रम नियमानुसार ही हुआ; विरोधियों ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया — महापौर अजीव पाटील

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क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह के उद्घाटन विवाद पर महापौर ने दी जानकारी

म.टा. वृत्तसेवा, वसई

विरार के बहुप्रतीक्षित क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह के उद्घाटन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह का उद्घाटन सभी नियमों का पालन करने तथा प्रशासन से चर्चा के बाद ही आयोजित किया गया था, ऐसा दावा महापौर अजीव पाटील ने पत्रकार परिषद में किया। प्रोटोकॉल के उल्लंघन के भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने सांसद और मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर गुमराह किया तथा प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया।

महापौर अजीव पाटील ने बताया कि क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह के कार्यों की जांच तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनके उद्घाटन का निर्णय महापालिका प्रशासन के साथ मिलकर लिया गया था। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्वयं आयुक्त के साथ दोनों परिसरों का निरीक्षण भी किया था। सभी संबंधितों को प्रोटोकॉल के अनुसार आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, ऐन मौके पर आयुक्त को बुलेट ट्रेन से संबंधित कार्यक्रम के लिए दिल्ली जाना पड़ा। इसके बाद अतिरिक्त आयुक्त और प्रशासन के साथ चर्चा कर महापौर के हस्ताक्षर से निमंत्रण पत्र भेजने का निर्णय लिया गया।

महापालिका के अधिकारी और कर्मचारियों के माध्यम से निमंत्रण संबंधित लोगों तक पहुंचाए गए। उपायुक्त स्वयं पालकमंत्री के कार्यालय जाकर निमंत्रण देकर आए थे। इसके अलावा विधायक राजन नाईक, विधायक स्नेहा दुबे, सांसद हेमंत सवरा, विपक्ष के नेता मनोज पाटील, गुटनेता अशोक शेळके, विधायक निरंजन डावखरे और विधायक रवींद्र फाटक से चर्चा कर उन्हें पत्र के माध्यम से सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया था।

इसके बावजूद भाजपा ने किसी तरह की चर्चा किए बिना अचानक प्रोटोकॉल का मुद्दा उठाते हुए आपत्ति दर्ज कराई। महापौर ने स्पष्ट किया कि, “जीआर (शासकीय निर्णय) कानून नहीं है। हमने सभी को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया था।”

महापौर ने यह भी सवाल उठाया कि एक ओर विरोधक काम अधूरा होने का आरोप लगाते हैं, तो आंदोलन के बाद वे स्वयं उद्घाटन कैसे कर सकते हैं? आचोळे स्थित नाट्यगृह का उद्घाटन होने के बाद विरोधक वहां पहुंचे और चल रहे कार्यक्रम को रोककर दोबारा उद्घाटन किया, इस पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। महापौर ने कहा कि पूरा कार्यक्रम नियमानुसार आयोजित किया गया था। यदि इसमें कोई प्रशासनिक अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक प्रक्रिया नियमानुसार; चर्चा का अवसर होने के बावजूद आंदोलन क्यों?

विरार के बोळींज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लोकार्पण को लेकर विरोधियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और शहर के विकास कार्यों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसा स्पष्ट बयान महापौर की ओर से दिया गया।

वसई-विरार शहर के समग्र विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बोळींज स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आचोळे स्थित नाट्यगृह का लोकार्पण 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया गया था। खेल, कला, संस्कृति और युवाओं के विकास को बढ़ावा देने वाले इन दोनों प्रकल्पों के लोकार्पण के लिए महापालिका की ओर से नियमानुसार निमंत्रण दिए गए थे। इसलिए विरोधियों को जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखने का आरोप गलत है।

महापालिका के आधिकारिक कार्यक्रमों के निमंत्रण नगर सचिव के माध्यम से नियंत्रित किए जाते हैं। इस कार्यक्रम के लिए भी प्रशासन के स्तर पर निमंत्रण की प्रक्रिया पूरी की गई थी। प्रशासन द्वारा तैयार किया गया महापौर के नाम का पत्र नगर सचिव के माध्यम से भेजा गया था। इस पर विरोधियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पत्र स्वयं महापौर की ओर से भेजा जाना चाहिए। इसके बाद संबंधित पत्र वापस ले लिया गया और फिर वसई-विरार के महापौर अजीव यशवंत पाटील की ओर से स्वतंत्र रूप से निमंत्रण पत्र भेजा गया।

हालांकि, जिस प्रक्रिया पर आपत्ति जताकर प्रशासन द्वारा तैयार महापौर के पत्र को वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया, उसके बाद महापौर अजीव यशवंत पाटील द्वारा स्वयं निमंत्रण जारी किए जाने पर भी आपत्ति जताना विरोधियों की विरोधाभासी भूमिका है, ऐसा सवाल बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) की ओर से उठाया गया है।

महापालिका के कार्यक्रमों में उपस्थित रहने वाले गणमान्य व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों और सम्मानित अतिथियों के लिए सम्मानचिह्न तथा कार्यक्रम से संबंधित अन्य तैयारियां भी प्रशासन के माध्यम से की गई थीं। इसलिए प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर की गई नियमित कार्यवाही पर भी राजनीतिक आपत्ति जताना उचित नहीं है।

विशेष रूप से, विरोधक वसई-विरार के महापौर अजीव यशवंत पाटील के हाथों स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करने के लिए तैयार थे। यदि महापौर के हाथों उद्घाटन पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी, तो इसके बाद उद्घाटन कार्यक्रम पर आपत्ति जताने का कारण क्या है, ऐसा सवाल उठाया गया है। विरोधियों को किसी प्रकार की आपत्ति या सुझाव थे, तो वे महापौर अजीव यशवंत पाटील के साथ सीधे चर्चा कर सकते थे।

इस पूरे विवाद के दौरान सांसद के माध्यम से चर्चा भी हुई थी। सांसद द्वारा किए गए अनुरोध का सम्मान करते हुए महापौर अजीव यशवंत पाटील ने संबंधित लोगों के साथ चर्चा करने की तैयारी दिखाई थी। जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा कर समस्या का समाधान करने का अवसर उपलब्ध होने के बावजूद आंदोलन का रास्ता अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह सवाल उठाया जा रहा है।

उद्घाटन करने वाले व्यक्ति की पृष्ठभूमि पर भी सवाल

उद्घाटन के लिए उपस्थित व्यक्ति की पृष्ठभूमि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, विरार स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन जिस व्यक्ति के हाथों किया गया, क्या विरोधियों ने उनकी पृष्ठभूमि की जांच की है, ऐसा सवाल भी उठाया गया है।

माजी विधायक क्षितिज ठाकुर उच्च शिक्षित हैं और स्वयं खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने खेल क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है और राज्य स्तर पर पदक भी प्राप्त किए हैं। इसलिए खेल क्षेत्र से जुड़े तथा स्वयं खिलाड़ी रहे व्यक्ति के हाथों क्रीड़ा संकुल का उद्घाटन किए जाने पर आपत्ति का वास्तविक कारण क्या है, इसका स्पष्टीकरण विरोधियों को देना चाहिए।

इसी प्रकार सोपारा में विकास कार्य के उद्घाटन के दौरान माजी महापौर प्रविणा ठाकुर के हाथों उद्घाटन किए जाने पर भी विरोधियों ने आपत्ति जताई थी। यदि किसी व्यक्ति की राजनीतिक या सार्वजनिक पृष्ठभूमि के आधार पर उद्घाटन पर आपत्ति की जाती है, तो विरोधियों को इसके लिए समान मापदंड स्पष्ट करने चाहिए। एक जगह एक भूमिका और दूसरी जगह अलग भूमिका क्यों, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।

अन्य महापालिकाओं में भी यही प्रशासनिक प्रक्रिया

इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन अन्य महापालिकाओं में विरोधियों की सत्ता है, वहां भी विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम प्रशासन के माध्यम से इसी प्रकार आयोजित किए जाते हैं। निमंत्रण पत्र तैयार करना, गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करना, कार्यक्रम का नियोजन करना, सम्मानचिह्नों की व्यवस्था करना तथा जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विकास कार्यों का लोकार्पण करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

इसलिए अन्य महापालिकाओं में जिस कार्यप्रणाली के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, उसी प्रक्रिया का वसई-विरार में पालन किए जाने पर आपत्ति क्यों, यह सीधा सवाल उठाया गया है।

यदि विरोधियों का कहना है कि यह कार्यप्रणाली ही गलत है, तो क्या वे अपनी सत्ता वाली अन्य महापालिकाओं में भी इसी प्रकार आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर आपत्ति जताएंगे? वहां प्रशासन द्वारा तैयार किए जाने वाले निमंत्रण, उद्घाटन की प्रक्रिया और मान्यवरों की उपस्थिति को लेकर भी क्या वे यही भूमिका अपनाएंगे, यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। अन्यथा वसई-विरार में एक मापदंड और अपनी सत्ता वाली महापालिकाओं में दूसरा मापदंड अपनाने का संदेश जनता में जाने की संभावना है।

विकास कार्य किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं

वसई-विरार शहर में होने वाले विकास कार्य किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति की संपत्ति नहीं हैं। ये कार्य महापालिका के माध्यम से नागरिकों के हित के लिए किए जाते हैं। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नाट्यगृह जैसे प्रकल्प शहर के युवाओं, खिलाड़ियों, कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए ऐसे विकास कार्यों के लोकार्पण को राजनीतिक विवाद का रूप देना शहर के हित में नहीं है।

वसई-विरार के महापौर अजीव यशवंत पाटील ने जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की भूमिका अपनाई थी। सांसद के अनुरोध का सम्मान करते हुए चर्चा के लिए पहल करने की तैयारी भी उन्होंने दिखाई थी। ऐसे में संवाद के रास्ते खुले होने के बावजूद आंदोलन कर प्रतीकात्मक उद्घाटन करने की भूमिका विकास कार्यों की अपेक्षा राजनीतिक प्रचार को अधिक महत्व देने वाली है, ऐसा कहा गया है।

महापालिका के अन्य कार्यक्रमों में भी प्रशासन, महापौर और पदाधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करते हैं। विरोधियों की राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रत्येक कार्यक्रम की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बदली जा सकती। महापालिका प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, ऐसे में जनप्रतिनिधियों से विकास कार्यों में सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

बहुजन विकास आघाड़ी का जोर विकास की राजनीति पर है। वसई-विरार शहर के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें, युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध हों, कलाकारों को सांस्कृतिक मंच मिले और शहर का समग्र विकास हो, इसके लिए महापालिका के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं।

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नाट्यगृह इसी विकास दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। इसलिए उद्घाटन किसके हाथों हुआ, निमंत्रण पत्र पर किसका नाम था या कार्यक्रम में कौन उपस्थित था, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इन विकास कार्यों का नागरिकों को कितना लाभ मिलेगा।

विरोधियों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए। निमंत्रण प्रक्रिया, प्रशासन की भूमिका, महापौर अजीव यशवंत पाटील द्वारा अपनाई गई चर्चा की भूमिका और उद्घाटन के लिए उपस्थित मान्यवरों की पृष्ठभूमि से संबंधित सभी बातें स्पष्ट होने के बावजूद जनता को गुमराह करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

वसई-विरार की जनता को विकास चाहिए, उद्घाटन के श्रेय को लेकर राजनीतिक संघर्ष नहीं। शहर के विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। विकास कार्यों में राजनीति लाने के बजाय विकास को प्राथमिकता देना ही जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है।

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