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दादर जैन ज्ञान मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया श्री महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

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मुंबई। सिद्धार्थ राजा के कुलदीपक, माता त्रिशला के पुत्र, परम कृपालु भगवान श्री महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक के अवसर पर यह भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ, श्री आत्म कमल लब्धि सूरीश्वरजी जैन ज्ञान मंदिर तथा जिन रक्षा इंटरनेशनल ग्रुप द्वारा किया गया।
शासन प्रदीप परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री विजय प्रदीप चंद्र सूरीश्वरजी महाराज साहब की पावन निश्रा में भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक का सुंदर एवं प्रेरणादायक वर्णन किया गया। आज चाहे ग्लोबल वार्मिंग हो या आतंकवाद, भगवान महावीर के दो सिद्धांत ही दुनिया को बचा सकते हैं।अपरिग्रह: प्रकृति का शोषण बंद करें, केवल आवश्यकता के अनुसार ही उपयोग करें। कार्यक्रम की शुरुआत सभी पंडितों, शिक्षकों और पाठशाला की शिक्षिकाओं की उपस्थिति में उपाध्यक्ष संजयभाई शाह, अशोकभाई चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजय शाह एवं संदीप दोशी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
इस अवसर पर श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ द्वारा कार्यक्रम में 3 से 10 वर्ष के बच्चों के भगवान महावीर के जन्म महोत्सव का अत्यंत सुंदर प्रस्तुतिकरण के लिए ‘बेस्ट संस्था’ के रूप में जैन रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।। 200 से अधिक बच्चों तथा गुरुकुल और दादर की विभिन्न पाठशालाओं के 50 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।
महावीर जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में जीव रक्षा युवक ग्रुप, दादर द्वारा 700 किलो (लगभग 11,000) लड्डुओं का वितरण दादर के सभी देरासरों तथा आसपास के क्षेत्रों में प्रसाद स्वरूप किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संजयभाई शाह, अशोकभाई चरला तथा अल्पाबेन संजय शाह का विशेष सम्मान किया गया। साथ ही मुंबई के दो जिन शासन रत्नों को उनके जीव रक्षा कार्यों के लिए ‘जिन रक्षा 2026 ऑनरेरी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

श्री प्रकाशचंद्र सूरजमल गांधी (ओशिया जेम्स, बीकेसी) श्रीमती कुमुदबेन हितेशभाई चुन्नीलाल गुटका (दादर-प्रभादेवी) शिक्षण संघ के ट्रस्टी उपाध्यक्ष संजयभाई शाह ने जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांतों, अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है, जो आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग पर ले जाती है। जैन धर्म विश्व का एक प्राचीन धर्म है, जो जीवदया, अहिंसा और आत्मशुद्धि पर जोर देता है। पाठशाला इस धर्म के मूल रूप के सिद्धांतों को बच्चों में रोपने का पवित्र कार्य करती है। पाठशाला के माध्यम से बच्चों को धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, नैतिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा दी जाती है। यह भविष्य की पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़े रखने का अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है, जो उन्हें विनय, विवेक और जीवदया जैसे गुण सिखाकर, आत्मा के महत्व को समझाता है। 655 से अधिक स्कूलों में 1300 से अधिक शिक्षक अपना योगदान दे रहे हैं। आज मुंबई के स्कूलों में 7,50,000 से अधिक बच्चे धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजय शाह ने बताया कि बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए जिन शासन के दो प्रमुख आधार स्तंभ – जिनबिंब और जिनागम की सही समझ बच्चों को पाठशाला से ही प्राप्त होती है। समयानुकूल शिक्षण पद्धति अपनाना और निरंतर प्रोत्साहन देना आवश्यक है। शिक्षण संघ के ट्रस्टी अशोकभाई ने अपने वक्तव्य में कहा कि यदि भगवान महावीर का शासन पंचम आर के अंत तक बनाए रखना है, तो उनके सिद्धांतों को बच्चों में संस्कार रूप में स्थापित करना आवश्यक है, जिसका सर्वोत्तम माध्यम पाठशाला है। जीव रक्षा युवक ग्रुप के अध्यक्ष संदीप दोशी का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर दादर आराधना भवन के ट्रस्टीगण जीतूभाई मेहता, जवाहरभाई मोतीचंद जवाहरभाई मेहता, जयंतीभाई शाह जिनय नीरज शाह, दीपकभाई गांधी, कल्पेशभाई गढ़ेचा, शांतीभाई तथा मितेशभाई सावला सहित अन्य सभी ट्रस्टी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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