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शांति दूत डॉ. विश्वनाथ कराड ने पूर्व सांसद डॉ. सुनील बलिराम गायकवाड़ को सम्मानित किया।

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पुणे : भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता की विरासत को संरक्षित करने में योगदान देने वाले प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ दा कराड, महाराष्ट्र रत्न व्यक्तित्व, दार्शनिक, शांति कार्यकर्ता, पांच विश्वविद्यालयों के संस्थापक, एमआईटी के संस्थापक, लातूर के लोकप्रिय डॉ. प्रोफेसर विश्वनाथ दा कराड कोथरुड शैक्षणिक परिसर में संसद रत्न, कार्यकारी सम्राट पूर्व सांसद व मानवाधिकार न्याय जन सेवा ट्रस्ट (नई दिल्ली) के राष्ट्रीय सलाहकार प्रो. डॉ. सुनील बलिराम गायकवाड़ को स्मृति चिन्ह और शॉल ओढ़ाकर विधिवत सम्मानित किया गया।
डॉ. विश्वनाथ कराड ने केंद्र सरकार की कई विकास कार्य योजनाओं और विशेष रूप से लातूर में एनईईटी परीक्षा केंद्र और पासपोर्ट सेवा केंद्र और रेलवे बोगी फैक्ट्री के लिए एक उच्च शिक्षित सांसद के रूप में 2014 से 2019 तक पूर्व सांसद डॉ. सुनील बलिराम गायकवाड़ द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। नांदेड़।उन्होंने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल जैसे अनेक उपयोगी कार्य करने पर संतोष व्यक्त करते हुए डॉ. सुनील गायकवाड़ को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय परिसर में उनका सम्मान एवं अभिनंदन किया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर डॉ. सुनील बलिराम गायकवाड द्वारा लिखित ‘किससे कहती है राजभाषा?’ डॉ. सुनील गायकवाड ने डॉ. विश्वनाथ कराड को दो पुस्तकें “नेता विथ अम्बिलिकल कॉर्ड टू पब्लिक सर्वेंट लैंड” भेंट कर डॉ. विश्वनाथ कराड का आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कई अधिकारी उपस्थित थे। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख डॉ. ब्रिजेश कुंतल, पंच पांडव परिवार के वंशज, चोखामेला साहित्य सम्मेलन के मुख्य संगठक सचिन पाटिल, भाजपा विस्तारक सिद्धेश्वर माने उपस्थित थे।

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