बोले- इथेनॉल का उत्पादन और उपयोग बढ़ने से पेट्रोलियम बाजार के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षित रह सकता है देश

मुंबई, 28 सितंबर। इथेनॉल का उत्पादन, प्रसार और उपयोग बढ़ाया जाए तो अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव तथा भू-राजनीतिक जोखिमों से देश को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह प्रतिपादन राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को किया।
उन्होंने कहा, “गन्ने के खेत इथेनॉल के कुएं और जलाशयों जैसे होने चाहिए। इस क्षेत्र में हमें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए।” बागडे भारत इथेनॉल फोरम, ग्लोबल टर्मरिक कॉन्क्लेव, मक्का बाजार परिषद एवं प्रदर्शनी तथा बायो रिसोर्सेस एवं सर्क्युलर इकॉनॉमी परिषद एवं प्रदर्शनी के संयुक्त मंच से बोल रहे थे।
इथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों की सराहना की।
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष तथा सहकारी चीनी मिल क्षेत्र का व्यापक अनुभव रखने वाले बागडे ने कहा कि देश में इथेनॉल मिश्रण की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उस समय राम नाईक पेट्रोलियम मंत्री थे। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की पहली प्रायोगिक परियोजना महाराष्ट्र के मनमाड में शुरू हुई थी, जहां पेट्रोल-डीजल के बड़े डिपो हैं। उस समय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के रूप में वे स्वयं वहां उपस्थित थे।
चीनी मिलों के लिए इथेनॉल महत्वपूर्ण
बागडे ने कहा, “चीनी मिलें केवल चीनी के उत्पादन के सहारे टिक नहीं सकतीं। उनका आर्थिक ढांचा उप-उत्पादों पर निर्भर करता है। केवल चीनी उत्पादन करने वाली कई सहकारी चीनी मिलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद बिजली उत्पादन के लिए सह-विद्युत परियोजनाएं शुरू हुईं, फिर इथेनॉल परियोजनाएं और अपनी डिस्टिलरी स्थापित की गईं।”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के समर्थन और पूंजीगत अनुदान के कारण महाराष्ट्र सहित पूरे देश में इथेनॉल परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हुआ।
इथेनॉल का उपयोग वाहनों के ईंधन के अलावा औद्योगिक रसायनों, दवाइयों, पेय पदार्थों और हैंड सैनिटाइजर में भी किया जाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान इथेनॉल की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सैनिटाइजर की मांग काफी बढ़ गई थी।
उन्होंने बताया कि उस समय इथेनॉल करीब 57 रुपये प्रति लीटर था, जबकि पांच लीटर का सैनिटाइजर कैन 2,000 रुपये तक में बेचा जा रहा था। उन्होंने कहा कि उत्पादन का लाइसेंस लेकर इथेनॉल को उचित मात्रा में पतला किया गया, उसमें रंग मिलाकर सैनिटाइजर तैयार किया गया और ग्राम पंचायतों को पांच लीटर का कैन केवल 400 रुपये में उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा, “हमने बहुत मामूली लाभ रखा। संकट के समय मुनाफाखोरी नहीं, बल्कि जनसेवा महत्वपूर्ण होती है।”
मक्का और कृषि अवशेषों से भी बन सकता है इथेनॉल
राज्यपाल ने कहा कि इथेनॉल केवल गन्ने के रस और शीरे से ही नहीं, बल्कि मक्का और कृषि अवशेषों से भी तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “धातु, पत्थर या प्लास्टिक को छोड़कर लगभग किसी भी जैविक पदार्थ से थोड़ी मात्रा में ही सही, इथेनॉल प्राप्त किया जा सकता है।”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इथेनॉल आवश्यक : सहकारिता मंत्री
राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील ने कहा कि किसानों के लिए चीनी मिलें आवश्यक हैं, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गन्ना उत्पादक किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए इथेनॉल उत्पादन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “कार्बन उत्सर्जन के कारण देश के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हैं। दिल्ली हो, मुंबई हो या अन्य राज्य, पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। जापान या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जाने पर हवा में अंतर तुरंत महसूस होता है।”
उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण त्वचा रोगों से लेकर कैंसर तक की बीमारियां बढ़ रही हैं। वाहनों को इथेनॉल और वैकल्पिक ऊर्जा पर चलाना इसका समाधान हो सकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
वसमत की हल्दी अब अपने नाम से बाजार में
विधायक तथा वसमत स्थित बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष हेमंत पाटील ने कहा कि हल्दी से किसान को प्रति एकड़ कम से कम एक लाख रुपये की आय हो सकती है, लेकिन अब तक इस फसल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि हिंगोली, नांदेड, वाशिम, परभणी, वर्धा और यवतमाल का क्षेत्र देश के कुल हल्दी उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। पहले इस क्षेत्र में अनुसंधान की पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं। किसान हल्दी का उत्पादन करते थे, लेकिन उसे सांगली के नाम से बेचा जाता था।
उन्होंने कहा कि अब वसमत की हल्दी को भौगोलिक संकेतक (GI) प्राप्त हो गया है और इसे अपने नाम से बाजार में लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अनुसंधान केंद्र हल्दी की गुणवत्ता और उत्पादन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहा है।
‘इथेनॉल जनता पार्टी’ पर पाशा पटेल की टिप्पणी
इथेनॉल का विरोध करने वालों पर राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री के पर्यावरण एवं सतत विकास कार्यबल के कार्यकारी अध्यक्ष पाशा पटेल ने तीखी टिप्पणी की। वे ‘भारत इथेनॉल फोरम : फ्यूलिंग भारत, पावरिंग ग्रोथ’ सम्मेलन में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब इथेनॉल को ‘पावर अल्कोहल’ कहा जाता था, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू भी इसके महत्व को समझते थे।
पटेल ने कहा, “फिलहाल इथेनॉल के बारे में कई गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। इसे बदनाम करने के लिए कुछ लोगों ने मानो ‘इथेनॉल जनता पार्टी’ ही बना ली है। पर्याप्त जानकारी के बिना इस विषय पर बोलना नहीं चाहिए।”
ब्राजील से लेकर भारत तक इथेनॉल का इतिहास
इथेनॉल के इतिहास का उल्लेख करते हुए पाशा पटेल ने कहा कि इसका व्यावसायिक उपयोग ब्राजील में 1930 के दशक में तेजी से सामने आया। 1930 में वहां गन्ने के दाम गिर गए थे। गन्ने का उपयोग केवल चीनी उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि वाहनों के ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है, यह दिखाने के लिए ब्राजील सरकार ने ‘पावर अल्कोहल’ तैयार किया और उससे वाहन चलाए गए।
उन्होंने कहा कि भारत में भी उस समय इस दिशा में काम हुआ था। मैसूर के कृष्णराज वाडियार ने 1930 के दशक में मंड्या में चीनी मिल स्थापित की, 1940 तक पावर अल्कोहल का उत्पादन शुरू किया और 1945 तक इसके लिए कानून भी बनवाया गया।
पटेल ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में भी पावर अल्कोहल की आवश्यकता का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार, पुस्तक में नेहरू ने लिखा था कि देश को पावर अल्कोहल की आवश्यकता है, लेकिन ब्रिटिश तेल कंपनी बर्मा-शेल इसके उत्पादन में बाधा बन रही थी।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद देश में इथेनॉल क्षेत्र को लंबे समय तक अपेक्षित गति नहीं मिल सकी।
ई-10 और ई-20 के बाद फ्लेक्स-फ्यूल की ओर
पाशा पटेल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय पेट्रोल में 5 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का निर्णय लिया गया था। इसके बाद ई-10 और ई-20 जैसे मिश्रणों की दिशा में देश आगे बढ़ा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद इथेनॉल के खिलाफ विभिन्न प्रकार के विरोध सामने आए।
उन्होंने आरोप लगाया कि “कमीशन लॉबी” ने इसका विरोध करने का निर्णय लिया।
पटेल ने इथेनॉल उत्पादकों से भी आगे आकर इथेनॉल के संबंध में फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार का जवाब देने का आह्वान किया।

