
पालघर, 29 सितंबर: राज्य सरकार ने प्रदेश के 34 जिलों में सूखा घोषित किया है, लेकिन पालघर और ठाणे जिलों को इससे बाहर रखा गया है। इस निर्णय की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए पालघर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. हेमंत सवरा ने पालघर जिले को भी अन्य जिलों की तरह सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सांसद डॉ. सवरा ने पालघर जिले में वर्षा की वास्तविक स्थिति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार जिले में औसत से कुछ अधिक बारिश हुई दिखाई देती है, लेकिन यह आंकड़ा जमीनी स्थिति को सही तरीके से प्रदर्शित नहीं करता। पूरे मानसून सीजन में हुई अधिकांश बारिश केवल जुलाई महीने में हुई है।
उन्होंने बताया कि जून महीने की शुरुआत में बारिश के रुक जाने के कारण धान की बुआई में देरी हुई। वहीं, जुलाई के पहले दस दिनों और तीसरे सप्ताह में बादल फटने जैसी भारी बारिश के कारण जिले का कुल वर्षा आंकड़ा संतोषजनक दिखाई देता है। इसके विपरीत, अगस्त और सितंबर महीनों में कई तालुकों में शून्य से लेकर 10 मिलीमीटर से भी कम बारिश दर्ज की गई है।
सांसद डॉ. सवरा के अनुसार, वर्तमान में अधिकांश स्थानों पर धान की फसल हरी-भरी दिखाई दे रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि जब फसल में दाना भरने की अवस्था थी, उस समय पर्याप्त बारिश नहीं हुई। सितंबर के मध्य से तापमान में अचानक हुई वृद्धि के कारण जमीन में मौजूद नमी और पानी सूख गया है, जिससे धान की फसल पर संकट पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को राहत देने का आश्वासन दिया था। इसी आश्वासन की याद दिलाते हुए डॉ. सवरा ने पालघर जिले में खरीफ फसलों की वर्तमान स्थिति तथा जुलाई के अंतिम सप्ताह से बारिश की कमी की स्थिति का दोबारा सर्वेक्षण कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने मांग की है कि इस पुनः सर्वेक्षण के आधार पर पालघर जिले को भी सूखाग्रस्त घोषित किया जाए और जिले के प्रभावित किसानों को आवश्यक राहत एवं सहायता प्रदान कर न्याय दिया जाए।

