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मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला! जीनियोलॉजी समिति का कार्यकाल 2026 तक बढ़ाया !

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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज को जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाली जीनियोलॉजी समिति का कार्यकाल 2026 तक बढ़ा दिया है. यह समिति मराठा-कुनबी संबंधों से जुड़ी पात्रता तय करती है.

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ा रहा है. राज्य सरकार ने मराठा समाज के लिए जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में गठित जीनियोलॉजी समिति का कार्यकाल 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है.

यह समिति कुनबी और मराठा-कुनबी जाति से जुड़े पात्र व्यक्तियों की पात्रता का परीक्षण करती है. सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है. राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने 30 अगस्त को इसकी जानकारी दी.

जीनियोलॉजी समिति की भूमिका

महाराष्ट्र सरकार ने साल 2023 में ‘जस्टिस संदीप शिंदे समिति’ का गठन किया था, जिसे आमतौर पर जीनियोलॉजी समिति भी कहा जाता है. इस समिति का मुख्य कार्य मराठा समुदाय और कुनबी जाति के बीच ऐतिहासिक और वंशावली आधारित संबंधों की जांच करना है. 

समिति दस्तावेजों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के आधार पर यह निर्धारित करती है कि किन व्यक्तियों को कुनबी (OBC) वर्ग के आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है. इस तरह, समिति मराठा समाज को आरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

मराठा समाज की आरक्षण मांग

बता दें कि मराठा समुदाय लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहा है. समाज का तर्क है कि उनके पूर्वज मूल रूप से कृषक वर्ग, यानी कुनबी से जुड़े रहे हैं. ऐतिहासिक और सरकारी अभिलेखों में इस संबंध की पुष्टि करने का काम समिति कर रही है.

इस समिति की कार्यप्रणाली का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि मराठा समाज राज्य की बड़ी आबादी है और उनके आरक्षण से जुड़ा मुद्दा राजनीति और सामाजिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील रहा है.

सरकार का निर्णय और आगे का रास्ता

सरकार का मानना है कि इस समिति का कार्यकाल बढ़ाना जरूरी है ताकि पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जा सके. इससे न केवल मराठा समुदाय के लिए सामाजिक न्याय का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि OBC वर्गों के साथ आरक्षण को लेकर संतुलन भी कायम रह सकेगा. आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार के फैसले, मराठा समाज की लंबे समय से चली आ रही आरक्षण मांगों को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं

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