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बिजनेस के साथ स्पिरिचुअलिटी का संगम है देविदास नाईकरे के जीवन में

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मुंबई। जहाँ नेक इरादे हों और कर्म में आग हो, वहाँ असंभव कुछ भी नहीं। देविदास श्रावण नाईकरे ने इस मंत्र को सिर्फ जिया नहीं, बल्कि लाखों उद्यमियों के जीवन में उजाला फैलाया।
देविदास ग्रुप ऑफ कंपनी के संस्थापक के रूप में उन्होंने ये साबित किया कि असली सफलता सिर्फ पैसे कमाने में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और समाज में योगदान देने में है। अल्टीमेट मिलेनियर ब्लूप्रिंट – लोनावला की वादियों में आयोजित ये 4-दिवसीय कार्यक्रम, इस दर्शन का जीवंत प्रमाण बना। अंतिम दिन के अवॉर्ड समारोह में महाराष्ट्र भर के चुनिंदा व्यवसायियों को सम्मानित किया गया, जहाँ बॉलीवुड अभिनेता अली खान ने कहा, यह पुरस्कार सिर्फ जीत नहीं, आपकी सोच और साहस की पहचान है।

नाईकरे की कोचिंग एक अनोखा संगम है आधुनिक रणनीतियों का, माइंडसेट शिफ्ट का, मेडिटेशन और वैदिक साधनाओं का।
यह प्रोग्राम सिर्फ मुनाफा नहीं, स्वास्थ्य, रिश्ते और आंतरिक संतुलन में भी निखार लाती है।

उन्होंने 12 प्रेरणादायक पुस्तकें लिखीं हैं, 30 से अधिक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित, नाईकरे का योगदान शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास तक फैला है।

आज वे सिर्फ अध्यात्मिक बिजनेस कोच नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी सोच हैं।
उनका संदेश हर व्यवसायी के लिए है, जब मन में विश्वास हो, सोच में स्पष्टता हो, और कर्म में समर्पण हो – तब कोई भी सीमा आपको रोक नहीं सकती।

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