
गुवाहाटी की उद्यमी मेघाली दास ने पेश किया सोने-हीरे के गहनों का टिकाऊ विकल्प
मुंबई, 1 अक्टूबर 2026: असम की ग्रामीण महिलाओं द्वारा हाथों से तैयार किए जाने वाले बांस के गहनों ने मुंबई में आयोजित टेफ्लाज़ (Tefla’s) के राष्ट्रीय कृषि, बायोएनर्जी और कमोडिटी सम्मेलन में लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। गुवाहाटी की पत्रकार और उद्यमी मेघाली दास द्वारा ‘बैम्बू फैशन’ ब्रांड के तहत लगाए गए स्टॉल पर सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं और विदेशी मेहमानों की भीड़ लगी रही।
महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भी स्टॉल का दौरा कर बांस से तैयार गहनों को देखा। महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री पर्यावरण एवं सतत विकास टास्क फोर्स के कार्याध्यक्ष पाशा पटेल ने भी इस पहल का समर्थन किया और इसे मुंबई के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में सहयोग किया।
प्रयोग से कारोबार तक का सफर
मीडिया और सामाजिक कार्यों से जुड़ी मेघाली दास ने वर्ष 2016-17 के आसपास बांस के गहनों को लेकर प्रयोग शुरू किए। इस दौरान उन्होंने भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), NID और NIFT से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने प्रयोगों को व्यवस्थित कारोबार का रूप दिया।
23 फरवरी 2026 को गुवाहाटी के रुक्मिणी नगर में ‘बैम्बू फैशन’ के शोरूम तथा ‘नॉर्थ ईस्ट बैम्बू ज्वेलरी डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डीसी (हैंडीक्राफ्ट्स) कार्यालय, नॉर्थ ईस्ट केन एंड बैम्बू डेवलपमेंट काउंसिल (NECBDC) तथा असम स्टेट बैम्बू मिशन के अधिकारी उपस्थित रहे। संस्था के अनुसार, यह पूर्वोत्तर भारत का पहला बांस आभूषण ब्रांड और शोरूम है।
250 से अधिक डिजाइन उपलब्ध
‘बैम्बू फैशन’ के संग्रह में 250 से अधिक डिजाइन शामिल हैं। इनमें झुमके, हार, अंगूठियां, ब्रेसलेट, चूड़ियां और पारंपरिक असमिया ‘जापी’ से प्रेरित पुरुषों के कोट पिन शामिल हैं। स्थानीय बांस और जंगलों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बीजों से तैयार इन गहनों को हल्का और रसायन-मुक्त बताया गया है। नमी और फफूंद से बचाने के लिए इन पर प्राकृतिक पॉलिश की जाती है।
इन गहनों की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर बारीक कारीगरी वाले उत्पादों के लिए 5,000 रुपये तक जाती है।
1,000 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका का अवसर उपलब्ध कराना है। मेघाली दास अब तक 1,000 से अधिक महिलाओं को बांस के गहने बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वर्तमान में 25 से 30 महिलाओं का समूह अपने घरों से सीधे इन गहनों के उत्पादन में जुड़ा हुआ है।
‘बाय-बैक’ मॉडल के तहत ‘बैम्बू फैशन’ इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए गहनों को सीधे खरीदता है, जिससे उन्हें नियमित आय का अवसर मिलता है। इसके अलावा गुवाहाटी सेंट्रल जेल की महिला बंदियों को भी आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बांस के गहने बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है।
सोने-हीरे के विकल्प के रूप में बांस के गहने
मेघाली दास ने बांस के गहनों को सोने और हीरे के आभूषणों के टिकाऊ विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि कीमती धातुओं और रत्नों के पीछे होने वाली खनन गतिविधियों तथा उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, बांस से बने गहने प्रकृति के अनुकूल होने के साथ ग्रामीण कारीगरों के लिए रोजगार और आय का माध्यम भी बन सकते हैं।
बांस दुनिया में तेजी से बढ़ने वाले पौधों में शामिल है। कटाई के बाद यह दोबारा उग सकता है और कम पानी में भी विकसित होता है। यह मिट्टी के कटाव को रोकने तथा बढ़ते समय कार्बन अवशोषित करने में भी योगदान देता है। ऐसे में बांस आधारित उत्पाद टिकाऊ फैशन के साथ किसानों और ग्रामीण कारीगरों के लिए मूल्यवर्धन का माध्यम बन सकते हैं।
‘बैम्बू फैशन’ के बारे में
‘बैम्बू फैशन’ और ‘नॉर्थ ईस्ट बैम्बू ज्वेलरी डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर’, गुवाहाटी, हाथ से तैयार किए गए बांस के गहनों के डिजाइन और निर्माण के साथ ग्रामीण महिलाओं को बांस के आभूषण बनाने का प्रशिक्षण देता है। संस्था पारंपरिक असमिया शिल्प को आधुनिक और टिकाऊ डिजाइन के साथ जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है।
संपर्क:
मेघाली दास, संस्थापक
बैम्बू फैशन एवं नॉर्थ ईस्ट बैम्बू ज्वेलरी डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर
मकान नं. 27, नामघर पथ-1, रुक्मिणी नगर, गुवाहाटी – 781006, असम
फोन: +91 98640 54060


1 comment