होम क्रेडिट इंडिया की ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी 2026
मुंबई बनी भारत की महत्वाकांक्षा और एक्सपीरियंस इकोनॉमी की राजधानी

मुंबई, 22 अगस्त 2026। देश की प्रमुख कंज्यूमर फाइनेंस कंपनियों में शामिल होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी 2026’ का चौथा संस्करण जारी किया है। इस वर्ष की स्टडी की थीम ‘टैक्स राहत से वास्तविक बदलाव तक: कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च’ है।
स्टडी के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं की आर्थिक सोच में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। कर्ज तक बढ़ती पहुंच और जीएसटी सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत ने रोजमर्रा के घरेलू खर्च का दबाव कुछ कम किया है। इसके साथ ही लोगों का आर्थिक आत्मविश्वास मजबूत हुआ है और अपना घर खरीदना अब भी भारतीयों का सबसे बड़ा दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य बना हुआ है।
आर्थिक आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा कि वर्ष 2023 में ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी’ की शुरुआत भारत की आर्थिक सोच को समझने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो अपने लक्ष्यों को लेकर गंभीर है और वित्तीय मामलों में काफी विवेकपूर्ण रवैया अपनाता है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अध्ययन में कई महत्वपूर्ण आर्थिक रुझान सामने आए हैं। जीएसटी के बाद कीमतों में हुए बदलाव से मिली राहत और सही वित्तीय साधनों के इस्तेमाल से लोगों के लिए संपत्ति निर्माण तथा कारोबार के विस्तार के अवसर आसान हो रहे हैं।
मुंबई में आय और खर्च का संतुलन
स्टडी के मुताबिक मुंबई भारत की महत्वाकांक्षा और एक्सपीरियंस इकोनॉमी की राजधानी के रूप में अपनी पहचान बरकरार रखे हुए है। देश के सबसे महंगे शहरों में शामिल होने के बावजूद मुंबई के लोग आवश्यक खर्च, लाइफस्टाइल खर्च और दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम दिखाई दे रहे हैं।
मुंबई में औसत मासिक घरेलू आय 37,000 रुपये, जबकि औसत मासिक खर्च करीब 23,000 रुपये बताया गया है। घरेलू खर्च में आवश्यक खर्चों की हिस्सेदारी करीब 68 प्रतिशत है। अध्ययन के अनुसार, मासिक खर्च पूरा करने के बाद 49 प्रतिशत लोग बचत करने में सक्षम हैं।
मुंबई में बचत में 10 प्रतिशत अंक और निवेश में 28 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि जीवन-यापन की ऊंची लागत के बावजूद लोग अपनी वित्तीय योजनाओं पर लगातार ध्यान दे रहे हैं।
ग्रॉसरी और किराये पर सबसे ज्यादा खर्च
मुंबई के आवश्यक मासिक खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा खाद्यान्न एवं ग्रॉसरी का है, जो कुल खर्च का 25 प्रतिशत है। इसके बाद किराया 24 प्रतिशत, परिवहन 16 प्रतिशत, बच्चों की शिक्षा 15 प्रतिशत, मेडिकल खर्च 8 प्रतिशत, बिजली-पानी जैसे बिल 6 प्रतिशत, रसोई गैस 4 प्रतिशत और मोबाइल बिल 3 प्रतिशत का हिस्सा है।
फैशन और पर्यटन पर भी खर्च
लाइफस्टाइल और अपनी पसंद से किए जाने वाले खर्च में मुंबई देश के प्रमुख शहरों में आगे दिखाई देता है। इस श्रेणी में फैशन पर 34 प्रतिशत, पर्यटन एवं बाहरी यात्राओं पर 27 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर 24 प्रतिशत, घरेलू उपकरणों पर 10 प्रतिशत और घर की सजावट पर 4 प्रतिशत खर्च किया जाता है।
अपना घर खरीदना सबसे बड़ा सपना
स्टडी के अनुसार मुंबई के लोगों का सबसे बड़ा दीर्घकालिक आर्थिक सपना अपना घर खरीदना है, जिसे 33 प्रतिशत लोगों ने अपनी प्राथमिकता बताया। इसके बाद अपना कारोबार शुरू करना 29 प्रतिशत, बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत 15 प्रतिशत, पुराने कर्ज चुकाना 11 प्रतिशत और गाड़ी खरीदना 9 प्रतिशत प्रमुख आर्थिक लक्ष्य हैं।
इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उचित ब्याज दर और लचीली किश्तों वाला कर्ज सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन माना गया है। इसे 23 प्रतिशत लोगों ने प्रमुख सहारा बताया। इसके बाद फिक्स्ड डिपॉजिट 9 प्रतिशत, लाइफ इंश्योरेंस 6 प्रतिशत, सोने में निवेश 6 प्रतिशत, म्यूचुअल फंड एवं एसआईपी 5 प्रतिशत और हेल्थ इंश्योरेंस 5 प्रतिशत का स्थान है।
जीएसटी बदलावों से परिवारों को राहत
जीएसटी से जुड़े बदलावों के बारे में जागरूकता अभी मध्यम स्तर पर है, लेकिन 73 प्रतिशत लोगों का मानना है कि जीएसटी में हुए बदलावों के कारण परिवार की भलाई पर खर्च करना पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।
लोगों के मुताबिक सबसे अधिक बचत टू-व्हीलर की खरीद पर 33 प्रतिशत, स्मार्टफोन पर 29 प्रतिशत और घरेलू उपकरणों पर 28 प्रतिशत हुई है।
जीएसटी 2.0 के बाद 13 प्रतिशत लोग बेहतर गुणवत्ता वाले भोजन पर, जबकि 4 प्रतिशत लोग हेल्थकेयर पर अधिक खर्च कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि उपभोक्ता अपनी जीवन गुणवत्ता को लेकर खर्च करने को अभी भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
17 बड़े शहरों के उपभोक्ताओं पर आधारित अध्ययन
‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी 4.0’ का अध्ययन 18 से 55 वर्ष की आयु के कर्जदारों के बीच किया गया। इसमें भारत के 17 प्रमुख शहरों के विभिन्न आय वर्गों और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।
होम क्रेडिट इंडिया के बारे में
होम क्रेडिट इंडिया फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, टीवीएस होल्डिंग्स लिमिटेड की सहायक कंपनी है। कंपनी देश में कंज्यूमर फाइनेंस और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराती है।
कंपनी के अनुसार, सरल, भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने पर उसका विशेष ध्यान है। होम क्रेडिट इंडिया अब तक 2 करोड़ से अधिक ग्राहकों की वित्तीय यात्रा का हिस्सा बन चुकी है। कंपनी का नेटवर्क देश के 625 शहरों में लगभग 53,000 पॉइंट ऑफ सेल (PoS) तक फैला हुआ है।
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